सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर से उठी हरियाली की क्रांति — थार के प्रवेश द्वार से प्रदीप शर्मा का प्रकृति, पशु-पक्षी और राष्ट्र सेवा का अनोखा संकल्प

थार न्यूज़ लाइव/शंकर लाल रेवाड़िया/ जोधपुर/राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी और थार के प्रवेश द्वार जोधपुर से आने वाले पर्यावरण प्रेमी प्रदीप शर्मा आज उस सोच का प्रतीक बन चुके हैं, जहां प्रकृति प्रेम, राष्ट्रभक्ति और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा एक साथ दिखाई देती है। मरुस्थलीय क्षेत्र में हरियाली को बढ़ावा देना अपने आप में एक चुनौती है, लेकिन प्रदीप शर्मा ने इसे अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है।प्रदीप शर्मा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे पर्यावरण संरक्षण को केवल अपने तक सीमित नहीं रखते, बल्कि हर व्यक्ति तक इसे पहुंचाने का प्रयास करते हैं। वे हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में उपहार के रूप में पौधे देने की अनूठी परंपरा को बढ़ावा देते हैं। उनका मानना है कि “पौधा सबसे अनमोल उपहार है, जो जीवन देता है और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य प्रदान करता है।”
वे जहां भी जाते हैं, वहां पर्यावरण की चर्चा जरूर करते हैं। यहां तक कि शादी-विवाह जैसे पारंपरिक आयोजनों में भी वे ऐसा सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, जहां पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और प्रकृति के महत्व पर चर्चा हो। उनके इस प्रयास से सामाजिक कार्यक्रम भी जागरूकता का माध्यम बनते जा रहे हैं।तस्वीर में प्रदीप शर्मा एक पौधा हाथ में लिए नजर आते हैं, जो उनके हरित संकल्प और समर्पण का जीवंत प्रतीक है। उनकी वेशभूषा और व्यक्तित्व में भी हरियाली के प्रति उनका गहरा लगाव साफ झलकता है, मानो वे स्वयं प्रकृति के संदेशवाहक बन गए हों।वे पशु-पक्षियों के संरक्षण, जल बचाव और पर्यावरण संतुलन के लिए भी लगातार सक्रिय रहते हैं। उनके विचारों में राष्ट्रभक्ति और प्रकृति सेवा का गहरा संबंध है। वे मानते हैं कि “धरती, जल और वायु की रक्षा करना ही सच्ची देशभक्ति है।”प्रदीप शर्मा के निरंतर प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। लोग अब पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और पौधारोपण की ओर प्रेरित हो रहे हैं। उनका यह अभियान धीरे-धीरे एक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।जोधपुर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में उनका यह योगदान न केवल सराहनीय है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा भी है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो हरियाली की राह कहीं भी बनाई जा सकती है और प्रकृति की सेवा ही मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। 🌿

Thar News Live
Author: Thar News Live

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