भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) का ऐतिहासिक कदम
देश के प्रतिष्ठित संस्थान, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) ने अपने ‘फाउंडेशन फॉर साइंस इनोवेशन एंड डेवलपमेंट’ (FSID) के संचालन में एक बड़ा बदलाव किया है। संस्थान ने पहली बार किसी उद्योग विशेषज्ञ को अपना मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। ओमप्रकाश सुब्बाराव को FSID का नया CEO बनाया गया है, जो इस संस्थान के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत है। यह नियुक्ति न केवल नेतृत्व में बदलाव है, बल्कि यह IISc की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत संस्थान अब एक उद्योग-संचालित गवर्नेंस मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
नया मॉडल और भविष्य की राह
tharnewslive.com की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, FSID का लक्ष्य अब एक आत्मनिर्भर इकाई के रूप में विकसित होना है। इस नए मॉडल के तहत, संस्थान का ध्यान नवाचार (Innovation) और इनक्यूबेशन को गति देने पर केंद्रित होगा। ओमप्रकाश सुब्बाराव के नेतृत्व में, FSID का लक्ष्य आने वाले समय में एक हजार से अधिक औद्योगिक पहल शुरू करना और लगभग तीन सौ डीप-टेक स्टार्टअप्स को पोषित करना है। यह कदम भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
मुख्य उद्देश्य और प्रभाव
- औद्योगिक सहयोग: बड़ी कंपनियों और MSMEs के साथ साझेदारी को मजबूत करना ताकि शोध को वास्तविक उत्पादों में बदला जा सके।
- डीप-टेक स्टार्टअप्स: अगले कुछ वर्षों में 300 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करना।
- आत्मनिर्भरता: संस्थान को वित्तीय रूप से स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य करना।
- नवाचार को बढ़ावा: अकादमिक शोध को बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालना।
tharnewslive.com संवाददाता के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि ओमप्रकाश सुब्बाराव का अनुभव उद्योग और शिक्षा जगत के बीच की खाई को पाटने में निर्णायक साबित होगा, जिससे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिलेगी।
यह बदलाव स्पष्ट करता है कि अब भारतीय शैक्षणिक संस्थान केवल शोध तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे देश की अर्थव्यवस्था में एक सक्रिय भागीदार बनने की ओर अग्रसर हैं। ओमप्रकाश सुब्बाराव का अनुभव, जो उन्होंने वर्षों तक औद्योगिक क्षेत्र में अर्जित किया है, निश्चित रूप से IISc के नवाचारों को बाजार तक ले जाने में एक उत्प्रेरक का काम करेगा।
Author: Thar News Live








