व्हाइट-कोट टेरर: कैसे एक यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर रची गई खतरनाक साजिश, NIA की चार्जशीट में बड़ा खुलासा

व्हाइट-कोट टेरर: कैसे एक यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर रची गई खतरनाक साजिश, NIA की चार्जशीट में बड़ा खुलासा

देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे खौफनाक ‘व्हाइट-कोट टेरर’ मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दायर हालिया चार्जशीट में यह खुलासा हुआ है कि कैसे पढ़े-लिखे डॉक्टर और पेशेवर लोग आतंकी गतिविधियों में शामिल होकर देश की अखंडता को चुनौती दे रहे थे। इस मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टरों की भूमिका ने सुरक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है।

यूनिवर्सिटी कैंपस से अरावली की पहाड़ियों तक का सफर

जांच में सामने आया है कि इन संदिग्धों ने सबसे पहले बम बनाने के प्रयोग अपने यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर ही किए थे। उर्वरकों (fertilizers) का इस्तेमाल करके विस्फोटक मिश्रण तैयार करने के बाद, उन्होंने अपनी घातक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अरावली की सुनसान पहाड़ियों को चुना। tharnewslive.com की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ये आरोपी न केवल विस्फोटक बनाने में माहिर थे, बल्कि उन्होंने हथियारों का परीक्षण भी बेहद गोपनीय तरीके से किया था।

फंडिंग और हथियारों की खरीद का जाल

चार्जशीट के मुताबिक, इस पूरे मॉड्यूल को चलाने के लिए धन का प्रबंध एक यूनिवर्सिटी डॉक्टर के माध्यम से किया गया था। इस धन का उपयोग न केवल अवैध हथियारों की खरीद के लिए किया गया, बल्कि किराए के मकानों में एक गुप्त लैब भी बनाई गई थी। इन परिसरों का उपयोग रसायनों, उपकरणों और विस्फोटकों को आम जनता की नजरों से दूर रखने के लिए किया जाता था।

tharnewslive.com संवाददाता के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि रेड फोर्ट (लाल किला) पर संभावित हमले से ठीक पहले भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट की बरामदगी ने एक बड़े नरसंहार को टाल दिया।

मुख्य बिंदु और जांच के निष्कर्ष

  • आरोपियों ने उर्वरकों से विस्फोटक बनाने की तकनीक का इस्तेमाल किया।
  • यूनिवर्सिटी के भीतर ही बम परीक्षण करने का दुस्साहस किया गया।
  • अरावली की पहाड़ियों का उपयोग हथियारों के अभ्यास के लिए किया गया।
  • फंडिंग के लिए एक व्यवस्थित नेटवर्क का सहारा लिया गया।
  • रेड फोर्ट ब्लास्ट की साजिश को नाकाम करने के लिए NIA ने समय रहते बड़ी खेप बरामद की।

यह मामला इस बात का प्रमाण है कि कट्टरपंथी विचारधारा अब समाज के उन वर्गों में भी पैठ बना चुकी है, जिनसे शांति और मानवता की सेवा की उम्मीद की जाती है। फिलहाल, NIA इस पूरे नेटवर्क के अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है ताकि इस ‘व्हाइट-कोट टेरर’ की जड़ को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।

Thar News Live
Author: Thar News Live

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