Tharnewslive ब्यूरो: रक्षा मंत्रालय ने सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं के लिए रक्षा भूमि के हस्तांतरण और उपयोग को लेकर एक नई और स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है। इस कदम का उद्देश्य लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी लाना और नौकरशाही की बाधाओं को कम करना है। मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब रक्षा भूमि से संबंधित प्रस्तावों का निपटारा एक निश्चित समय-सीमा के भीतर करना अनिवार्य होगा।
प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने की कवायद
अक्सर देखा गया है कि सड़क निर्माण, मेट्रो विस्तार या अन्य सार्वजनिक उपयोगिता वाली परियोजनाओं के लिए रक्षा भूमि की आवश्यकता होती है, लेकिन एनओसी (NOC) और अन्य औपचारिकताओं में वर्षों लग जाते हैं। रक्षा मंत्रालय के इस निर्णय से अब राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों को राहत मिलेगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भूमि हस्तांतरण के प्रत्येक चरण के लिए एक डेडलाइन तय की गई है, जिसका पालन करना संबंधित अधिकारियों के लिए अनिवार्य होगा।
प्रमुख दिशा-निर्देश और मुख्य बिंदु
- रक्षा भूमि हस्तांतरण के आवेदनों की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
- परियोजनाओं की संवेदनशीलता के आधार पर मंजूरी के लिए समय-सीमा का वर्गीकरण किया गया है।
- भूमि के बदले भूमि (Land for Land) के प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए फाइलों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना देश के विकास कार्यों को गति देना है। नई समयसीमा से न केवल परियोजनाओं की लागत कम होगी, बल्कि समय पर पूरा होने से आम जनता को भी सीधा लाभ मिलेगा।’
रणनीतिक महत्व और भविष्य की राह
यह निर्णय विशेष रूप से पुणे और अन्य प्रमुख शहरों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां रक्षा भूमि और नागरिक विकास कार्यों के बीच अक्सर समन्वय की कमी देखी जाती है। मंत्रालय ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यदि किसी विशेष मामले में देरी होती है, तो उसका स्पष्ट कारण और जवाबदेही तय की जाएगी। यह नीतिगत बदलाव ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Author: Thar News Live








