Tharnewslive ब्यूरो: भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के शोधकर्ताओं ने एक नई अध्ययन रिपोर्ट जारी की है, जो केरल में स्वास्थ्य संकट की चेतावनी दे रही है। अध्ययन के अनुसार, प्रशांत महासागर में होने वाली ‘अल नीनो’ की घटना केरल में डेंगू के मामलों में भारी वृद्धि का कारण बन सकती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2040 तक राज्य में डेंगू के मामलों में 16 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
अल नीनो और डेंगू का कनेक्शन
शोध में पाया गया है कि जब प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ता है, तो इसका सीधा असर केरल के मौसम पर पड़ता है। अल नीनो के कारण मानसून-पूर्व के महीनों में मौसम शुष्क और गर्म हो जाता है। यह बदलती जलवायु मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करती है, जिससे डेंगू फैलाने वाले मच्छरों की आबादी तेजी से बढ़ती है।
पूर्वानुमान मॉडल से मिलेगी मदद
IITM के वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक फोरकास्टिंग मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल डेंगू के प्रकोप की भविष्यवाणी कई महीने पहले ही करने में सक्षम है। इस तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को समय रहते सतर्क किया जा सकेगा, जिससे मच्छरों के नियंत्रण और रोकथाम की रणनीतियों को बेहतर बनाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमें समय रहते चेतावनी मिल जाए, तो हम वेक्टर-जनित रोगों के प्रसार को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। यह मॉडल सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
मुख्य निष्कर्ष
- 2040 तक डेंगू के मामलों में 16-20% की संभावित वृद्धि।
- अल नीनो के कारण मानसून-पूर्व शुष्क मौसम मच्छरों के लिए प्रजनन का केंद्र बनता है।
- फोरकास्टिंग मॉडल से महीनों पहले मिल सकेगी चेतावनी।
- स्वास्थ्य अधिकारियों को मच्छर प्रबंधन रणनीतियों को मजबूत करने की सलाह।
Author: Thar News Live








