Tharnewslive ब्यूरो: मुंबई के चिकित्सा जगत में एक नई तकनीक ने उन मरीजों के लिए राहत की सांस दी है, जो पारंपरिक एमआरआई मशीनों के ‘ट्यूब’ जैसे आकार से घबराते हैं। स्टैंडिंग एमआरआई (Standing MRI) की सुविधा अब उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो रही है, जिन्हें क्लॉस्ट्रोफोबिया (बंद जगहों का डर) है या जो पारंपरिक मशीन में लेटने में असमर्थ हैं।
पीठ दर्द के सटीक निदान में सहायक
विशेषज्ञों का मानना है कि स्टैंडिंग एमआरआई का सबसे बड़ा लाभ ‘वेट-बेयरिंग’ (शरीर के भार के साथ) इमेजिंग है। जब मरीज खड़ा होता है, तो रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाला दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जो लेटने वाली पारंपरिक एमआरआई में अक्सर छूट जाता है। यह तकनीक पीठ दर्द और डिस्क संबंधी समस्याओं के सटीक निदान के लिए बेहद प्रभावी मानी जा रही है।
अभिनेता शरत सक्सेना से मिली प्रेरणा
हाल ही में इस तकनीक के प्रति लोगों का रुझान तब बढ़ा जब अभिनेता शरत सक्सेना के अनुभवों ने मरीजों को प्रेरित किया। कई मरीजों ने स्वीकार किया कि पारंपरिक एमआरआई की घुटन भरी प्रक्रिया के बजाय स्टैंडिंग एमआरआई ने उनके लिए जांच को सुगम बना दिया है।
रेडियोलॉजिस्ट्स का कहना है कि हालांकि स्टैंडिंग एमआरआई क्लॉस्ट्रोफोबिक मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, लेकिन इमेज क्वालिटी और डायग्नोस्टिक सटीकता के मामले में अभी भी पारंपरिक क्लोज्ड एमआरआई मशीनें ही स्वर्ण मानक (Gold Standard) बनी हुई हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु
- स्टैंडिंग एमआरआई उन लोगों के लिए आदर्श है जिन्हें बंद जगहों से डर लगता है।
- यह तकनीक रीढ़ की हड्डी की समस्याओं का बेहतर विश्लेषण प्रदान करती है।
- ओपन एमआरआई मशीनें सस्ती हो सकती हैं, लेकिन उनकी इमेज रेजोल्यूशन कम होती है।
- जटिल मामलों में डॉक्टर अभी भी पारंपरिक एमआरआई को प्राथमिकता देते हैं।
मुंबई के प्रमुख डायग्नोस्टिक सेंटर्स में अब इस तकनीक की उपलब्धता बढ़ रही है, जिससे मरीजों को अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार विकल्प चुनने की आजादी मिल रही है।
Author: Thar News Live








