Tharnewslive ब्यूरो: हंसी-मजाक और कॉमेडी के बादशाह माने जाने वाले दिग्गज अभिनेता भरत दाभोलकर ने हाल ही में अपने अभिनय का एक नया और गंभीर पहलू पेश किया है। मुंबई के मंच पर प्रीमियर हुए नए हिंग्लिश साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘जिगसॉ’ (Jigsaw) ने दर्शकों को अपनी सीट से बांधे रखा। इस नाटक में भरत दाभोलकर के साथ दामिनी चोपड़ा मुख्य भूमिका में नजर आईं, जिनकी केमिस्ट्री ने कहानी में जान फूंक दी है।
तूफानी रात और रहस्यों का जाल
यह नाटक एक ऐसी तूफानी रात की कहानी है, जो एक एकांत घर में सिमटी हुई है। जैसे-जैसे नाटक आगे बढ़ता है, दर्शकों के सामने परत-दर-परत गहरे राज और धोखे खुलते जाते हैं। कहानी का ताना-बाना इतनी कुशलता से बुना गया है कि दर्शक अंत तक यह तय नहीं कर पाते कि कौन नायक है और कौन खलनायक।
‘जिगसॉ’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और उनके पीछे छिपे अंधेरे का एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है।
क्यों खास है ‘जिगसॉ’?
- दो कलाकारों का जादू: केवल दो किरदारों के माध्यम से पूरे थ्रिलर को जीवंत करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे दाभोलकर और चोपड़ा ने बखूबी निभाया है।
- अनपेक्षित मोड़: कहानी में आने वाले ट्विस्ट दर्शकों को लगातार हैरान करते हैं।
- हिंग्लिश संवाद: भाषा का सरल और प्रभावी प्रयोग इसे आधुनिक दर्शकों के लिए और भी प्रासंगिक बनाता है।
प्रीमियर के दौरान हाउसफुल रहे इस नाटक ने साबित कर दिया है कि मुंबई का थिएटर जगत अब प्रयोगधर्मी कहानियों को हाथों-हाथ ले रहा है। भरत दाभोलकर का यह ‘चिलिंग’ अवतार उनके प्रशंसकों के लिए एक सुखद आश्चर्य है, जो उन्हें कॉमेडी से हटकर एक गंभीर अभिनेता के रूप में स्थापित करता है।
Author: Thar News Live








