Tharnewslive ब्यूरो: आईआईटी बॉम्बे में एक छात्र की दुखद आत्महत्या के मामले ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। मृतक छात्र के पिता ने संस्थान के प्रशासन और एक प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि संस्थागत प्रताड़ना का परिणाम बताया है। पिता का दावा है कि उनके बेटे को लंबे समय से जातिगत आधार पर निशाना बनाया जा रहा था, जिससे वह गहरे मानसिक तनाव में था।
जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के आरोप
पीड़ित छात्र के पिता ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका बेटा अपनी पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर था, लेकिन कैंपस के कुछ लोगों का व्यवहार उसे लगातार तोड़ने का काम कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष प्रोफेसर द्वारा कक्षा में और व्यक्तिगत रूप से उसे अपमानित किया जाता था, जिससे उसका मनोबल पूरी तरह टूट चुका था।
मेरे बेटे ने मुझे कई बार बताया था कि उसे जाति के नाम पर नीचा दिखाया जाता है। प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे उसका आत्मविश्वास खत्म हो गया।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना के बाद से ही आईआईटी बॉम्बे के कैंपस में छात्रों के बीच भारी आक्रोश है। छात्र संगठनों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब संस्थान में जातिगत भेदभाव की खबरें सामने आई हैं। पिता ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्होंने शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की।
मामले की मुख्य बातें:
- मृतक छात्र के पिता ने प्रोफेसर पर जातिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया है।
- प्रशासन पर शिकायतों को नजरअंदाज करने और उचित कार्रवाई न करने का आरोप है।
- छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
- संस्थान ने मामले की आंतरिक जांच के लिए एक समिति गठित करने का आश्वासन दिया है।
फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और पिता के बयानों के आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। इस घटना ने देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और समावेशी वातावरण पर एक बार फिर से बहस छेड़ दी है।
Author: Thar News Live








