Tharnewslive ब्यूरो: भारत और जापान के बीच हाल ही में खेले गए T20I मुकाबले में एक ऐसा वाकया देखने को मिला जिसने क्रिकेट के गलियारों में नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मैच के अंतिम ओवरों में जब जापान को जीत के लिए महज 6 रनों की दरकार थी, तब एक ‘वाइड बॉल’ के फैसले को अंपायर द्वारा पलटने के बाद मैदान पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।
क्या था पूरा विवाद?
जापान की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत की दहलीज पर खड़ी थी। खेल के अंतिम चार गेंदों पर 6 रनों की जरूरत थी, तभी भारतीय टीम के खिलाड़ियों ने अंपायर द्वारा दिए गए वाइड के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। भारतीय खेमे के विरोध के बाद अंपायर ने अपने फैसले पर पुनर्विचार किया और वाइड के संकेत को वापस ले लिया, जिससे मैच का समीकरण पूरी तरह बदल गया।
नियम क्या कहते हैं?
क्रिकेट के नियमों (MCC Laws) के अनुसार, अंपायर को यह अधिकार है कि वह गेंद के डेड होने से पहले अपने फैसले में सुधार कर सकता है। हालांकि, किसी भी फैसले को पलटने के लिए अंपायर का पूरी तरह आश्वस्त होना जरूरी है।
अंपायर का काम खेल की निष्पक्षता बनाए रखना है। यदि उन्हें लगता है कि निर्णय लेने में कोई तकनीकी चूक हुई है, तो वे खिलाड़ियों की अपील या अपने विवेक के आधार पर निर्णय को बदल सकते हैं, बशर्ते गेंद अगली डिलीवरी के लिए तैयार न हुई हो।
मैच के मुख्य बिंदु
- अंतिम 4 गेंदों पर जापान को 6 रनों की जरूरत थी।
- वाइड कॉल के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने अंपायर से चर्चा की।
- अंपायर ने अपने वाइड के फैसले को वापस लिया।
- फैसले के बाद मैच के अंतिम क्षणों में रोमांच और दबाव दोनों बढ़ गए।
यह घटना एक बार फिर क्रिकेट में ‘अंपायर के विवेक’ और ‘तकनीकी स्पष्टता’ के बीच के संतुलन पर सवाल उठाती है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादास्पद फैसलों से बचने के लिए अंपायरों को और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि खेल की भावना बरकरार रहे।
Author: Thar News Live








