Tharnewslive संवाददाता: राजस्थान के बालोतरा जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र में देश के पहले अत्याधुनिक क्षेत्रीय बाजरा अनुसंधान केंद्र का भव्य शुभारंभ किया गया है। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने इस महत्वपूर्ण संस्थान का आधिकारिक उद्घाटन किया। इस बहुप्रतीक्षित केंद्र के खुलने से थार के मरुस्थल और शुष्क क्षेत्रों में बाजरे की खेती को एक नया तकनीकी संबल मिलने की उम्मीद है, जिससे कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
ताज़ा अपडेट्स और मुख्य बिंदु (Fresh Updates)
- गुड़ामालानी में देश के पहले क्षेत्रीय बाजरा अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी द्वारा किया गया।
- इस परियोजना की आधारशिला तीन साल पहले रखी गई थी और अब इसका निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
- यह केंद्र विशेष रूप से शुष्क और बंजर परिस्थितियों में बाजरे की उन्नत किस्मों के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।
- उद्घाटन समारोह के दौरान देश भर के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक, स्थानीय किसान और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
- किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों और कीट नियंत्रण तकनीकों का प्रशिक्षण देने के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
विस्तार से समझें पूरा मामला (In-Depth Explanation)
बाजरा राजस्थान की प्रमुख फसल है और इसे ‘मोटा अनाज’ या ‘श्री अन्न’ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिल चुकी है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित मानसून और भूजल स्तर में गिरावट के कारण बाजरे की खेती लगातार नई चुनौतियों का सामना कर रही थी। इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए गुड़ामालानी में इस अनुसंधान केंद्र की परिकल्पना की गई थी। तीन साल पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी गई थी और अब अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान खेतों और प्रशासनिक भवन के साथ यह पूरी तरह से ऑपरेशनल हो गया है। यह केंद्र कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य क्षेत्रीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा। यहाँ वैज्ञानिक ऐसी किस्मों पर शोध करेंगे जो कम पानी में भी बेहतरीन पैदावार दे सकें और अत्यधिक तापमान को सहन करने में सक्षम हों। इसके अलावा, फसल कटाई के बाद के प्रबंधन और मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर भी विशेष जोर दिया जाएगा ताकि किसानों को उनकी उपज का सही और लाभकारी मूल्य मिल सके।
सामाजिक व आर्थिक प्रभाव (Social & Economic Impact)
पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि और पशुपालन पर निर्भर करता है, जहां बाजरा जीवन रेखा माना जाता है। इस अनुसंधान केंद्र के सक्रिय होने से न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। उन्नत और प्रमाणित बीज आसानी से उपलब्ध होने से किसानों की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा। बाजरा आधारित खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। युवाओं का कृषि की ओर रुझान बढ़ेगा और वे वैज्ञानिक खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। कुपोषण के खिलाफ जंग में भी बाजरा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इस केंद्र के माध्यम से पौष्टिक अनाजों के सेवन और उत्पादन को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने उद्घाटन के अवसर पर कहा कि यह अनुसंधान केंद्र देश के किसानों, विशेषकर शुष्क जोतों वाले किसानों के लिए वरदान साबित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार मोटे अनाजों को वैश्विक फलक पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है और यह केंद्र उस दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
संक्षिप्त निष्कर्ष (Summary & Outlook)
देश का पहला क्षेत्रीय बाजरा अनुसंधान केंद्र राजस्थान के गुड़ामालानी में शुरू होना भारतीय कृषि इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। यह न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के बीच की खाई को पाटेगा, बल्कि जलवायु अनुकूल खेती की दिशा में देश को आत्मनिर्भर भी बनाएगा। सरकार और वैज्ञानिकों के इस संयुक्त प्रयास से मरुस्थलीय क्षेत्रों में कृषि समृद्धि का नया सूर्योदय होगा और किसान सशक्त बनेंगे।
Author: Thar News Live








