Tharnewslive ब्यूरो: अमेरिकी कांग्रेस के एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को धर्मशाला के मैकलोडगंज में तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद अमेरिकी सांसदों ने चीन की वैश्विक दमनकारी नीतियों पर तीखा हमला बोला और तिब्बतियों की स्वतंत्रता के प्रति अमेरिका की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे सांसद ब्रायन मास्ट ने कहा कि बीजिंग की सीमा पार दमन की नीतियां केवल अपने देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दुनिया भर में रह रहे तिब्बतियों के लिए एक गंभीर और निरंतर खतरा पैदा कर रही हैं। दस सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न प्रांतों के सांसद शामिल रहे, जिन्होंने तिब्बती समुदाय के अधिकारों और उनकी संस्कृति की रक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर एकजुट होने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)
- अमेरिकी कांग्रेस के 10 सदस्यीय द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ने मैकलोडगंज में दलाई लामा से मुलाकात की।
- सांसद ब्रायन मास्ट ने चीन पर दुनिया भर में ट्रांसनेशनल रिप्रेशन यानी सीमा पार दमन चलाने का सीधा आरोप लगाया।
- प्रतिनिधिमंडल ने दलाई लामा के उत्तराधिकार मामले में चीन के संभावित हस्तक्षेप पर गहरी चिंता व्यक्त की।
- अमेरिकी सांसदों ने तिब्बत की स्वतंत्रता, संस्कृति और धार्मिक अधिकारों के लिए समर्थन दोहराया।
विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)
दलाई लामा से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अमेरिकी सांसद ब्रायन मास्ट ने ड्रैगन के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजिंग विभिन्न देशों में निगरानी तंत्र, जासूसों और पुलिस का इस्तेमाल करके असंतुष्टों और तिब्बतियों को दबाने का प्रयास कर रहा है। मास्ट ने कहा कि चीन का यह रवैया न केवल मानवाधिकारों का हनन है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच की वैचारिक लड़ाई स्पष्ट है, जहां अमेरिका स्वतंत्रता, लोकतंत्र और जन्मजात अधिकारों में विश्वास रखता है, वहीं दूसरी ओर सत्तावादी ताकतें हैं जो दमन के बल पर नियंत्रण पाना चाहती हैं।
बैठक के दौरान तिब्बती आध्यात्मिक गुरु के उत्तराधिकार के संवेदनशील मुद्दे पर भी चर्चा की गई। ब्रायन मास्ट ने चिंता जताई कि चीन भविष्य में दलाई लामा के उत्तराधिकारी के रूप में अपनी पसंद का कोई कठपुतली उम्मीदवार थोपने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजिंग पहले भी उत्तराधिकार प्रक्रिया से जुड़े लोगों के अपहरण जैसी गतिविधियों में संलिप्त रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए ‘अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट’ का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि इस तरह के विधायी कदम तिब्बतियों के अधिकारों को सुरक्षित करने में मील का पत्थर साबित होंगे।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल अन्य प्रमुख सदस्यों ने भी तिब्बत की जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया। सांसद जेम्स गैलाघर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका दुनिया भर में धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और तिब्बती मुद्दे पर बीजिंग के साथ संवाद और कूटनीतिक दबाव जारी रखा जाएगा। अमेरिकी नेताओं ने यह भी चेताया कि दुनिया का ध्यान कई अन्य वैश्विक संघर्षों पर केंद्रित होने के कारण तिब्बत का मुद्दा कई बार हाशिए पर चला जाता है, जिसे फिर से मुख्य पटल पर लाने की आवश्यकता है।
चीन का दमन चक्र अपनी सीमाओं से बहुत आगे तक फैला हुआ है। बीजिंग दुनिया के किसी भी कोने में पहुंचकर असंतुष्टों को दबाने और अपनी निगरानी बढ़ाने का प्रयास करता है, जिसे रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर एकजुट होने की आवश्यकता है। – ब्रायन मास्ट, अमेरिकी सांसद
भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)
अमेरिकी सांसदों का यह उच्चस्तरीय दौरा और दलाई लामा के साथ उनकी यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा संदेश देती है। एक ऐसे समय में जब चीन वैश्विक मंच पर अपनी शक्ति का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है, अमेरिका द्वारा तिब्बती स्वतंत्रता के पक्ष में इस प्रकार की मुखर बयानबाजी बीजिंग के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है। विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा से अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों में और गर्माहट आ सकती है, लेकिन साथ ही इससे तिब्बत मुक्ति आंदोलन को एक नई वैश्विक ऊर्जा और नैतिक समर्थन भी प्राप्त हुआ है। आने वाले दिनों में इस बात की पूरी संभावना है कि अमेरिकी संसद में तिब्बत के समर्थन में और अधिक कड़े कानून पारित किए जाएंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार का मुद्दा फिर से केंद्र में आ जाएगा।
Author: Thar News Live








