नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गुरुग्राम में जल निकायों के संरक्षण को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में जल निकायों की भूमि पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में एक सरकारी सीमांकन रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसमें पाया गया कि न केवल झुग्गियां और एक मंदिर बल्कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) द्वारा निर्मित एक सड़क और फुटपाथ भी जल निकाय की लगभग 1,077 वर्ग गज भूमि पर अतिक्रमण कर बने हुए हैं।
मामले का पूरा विवरण और NGT की सख्ती
Tharnewslive की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, NGT ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जल निकाय की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराएं और उसे उसके मूल स्वरूप में बहाल करें। ट्रिब्यूनल ने इस बात पर जोर दिया है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जल निकायों का पुनरुद्धार अनिवार्य है। सरकारी रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि HSVP जैसी सरकारी संस्थाओं द्वारा किया गया अतिक्रमण प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
Tharnewslive संवाददाता के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि NGT के आदेशों का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी और जल निकाय के संरक्षण के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
मुख्य बिंदु और प्रभाव
- जल निकाय की 1,077 वर्ग गज भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई है।
- अतिक्रमण में झुग्गियां, एक मंदिर और HSVP द्वारा निर्मित सड़क व फुटपाथ शामिल हैं।
- NGT ने भूमि को पूरी तरह से खाली कराकर उसे पुनर्जीवित करने का आदेश दिया है।
- सरकारी एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि उन्होंने स्वयं जल निकाय की जमीन पर निर्माण किया।
यह आदेश न केवल गुरुग्राम बल्कि पूरे एनसीआर क्षेत्र के लिए एक नजीर है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि जल निकायों को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में भूजल स्तर में भारी गिरावट और जलभराव जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी इन अतिक्रमणों को हटाकर जल निकाय को उसका अस्तित्व वापस दिलाता है।
Author: Thar News Live







