मामले की पृष्ठभूमि और विवाद
एक दलित मजदूर की संदिग्ध आत्महत्या के बाद उपजा विवाद अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। मृतक के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रशासन और प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर पुलिस ने बिना उनकी सहमति के शव का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। इस घटना के बाद से इलाके में भारी तनाव व्याप्त है और स्थानीय लोग न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।
परिजनों की मांग और विरोध प्रदर्शन
पीड़ित परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक राज्य के वित्त मंत्री की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक वे मृतक की ‘भोग’ रस्म संपन्न नहीं करेंगे। परिजनों का कहना है कि मजदूर की मौत के पीछे वित्त मंत्री के करीबियों का हाथ है और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। tharnewslive.com की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने न्याय के लिए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
tharnewslive.com संवाददाता के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है।
राजनीतिक घमासान और एससी आयोग का हस्तक्षेप
इस मामले में अनुसूचित जाति (SC) आयोग के अध्यक्ष ने स्वयं पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। वहीं, दूसरी ओर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। घटना स्थल पर पहुंचे भाजपा के काफिले को आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं ने रोक दिया, जिसके बाद दोनों दलों के समर्थकों के बीच जमकर नोकझोंक हुई।
प्रमुख बिंदु और घटनाक्रम
- मृतक के परिजनों ने पुलिस पर जबरन अंतिम संस्कार करने का गंभीर आरोप लगाया है।
- परिवार ने वित्त मंत्री की गिरफ्तारी तक भोग रस्म न करने का संकल्प लिया है।
- एससी आयोग के अध्यक्ष ने परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया है।
- भाजपा और आप कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
फिलहाल, प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन पीड़ित परिवार का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
Author: Thar News Live








