Tharnewslive ब्यूरो: बीकानेर जिले की छह नगर पालिकाओं के हालिया चुनाव परिणामों ने स्थानीय राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल दी हैं। इन नतीजों ने न केवल सियासी समीकरणों को नया रूप दिया है, बल्कि जिले के कद्दावर नेताओं के प्रभाव का भी सटीक आकलन पेश किया है। खाजूवाला, लूणकरणसर, श्रीडूंगरगढ़, देशनोक, नापासर और नोखा में आए परिणामों ने कहीं भाजपा को स्पष्ट बहुमत दिया है, तो कहीं कांग्रेस की वापसी कराई है। वहीं, कुछ निकायों में निर्दलीय और स्थानीय मंचों की भूमिका निर्णायक हो गई है।
खाजूवाला और लूणकरणसर में भाजपा का परचम
खाजूवाला नगर पालिका में भाजपा ने 20 में से 11 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इसे विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल की बड़ी राजनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, लूणकरणसर में मंत्री सुमित गोदारा की रणनीति पूरी तरह सफल रही। यहां 35 में से 23 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाकर अपनी संगठनात्मक पकड़ को साबित किया है।
श्रीडूंगरगढ़ और नापासर: निर्दलीय और मंच की भूमिका
श्रीडूंगरगढ़ में कांग्रेस 15 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बोर्ड गठन के लिए उसे विकास मंच के नौ पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। इसी तरह नापासर में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। भाजपा 10 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन सात सीटों वाली कांग्रेस और सात निर्दलीय पार्षदों के बीच सत्ता का संघर्ष अब तेज हो गया है।
स्थानीय निकाय चुनाव के ये परिणाम बताते हैं कि अब जनता केवल पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि स्थानीय विकास और प्रभाव के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुन रही है।
देशनोक में कांग्रेस और नोखा में विकास मंच का जलवा
- देशनोक: कांग्रेस ने 25 में से 16 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की है, जो भाजपा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
- नोखा: विकास मंच ने 45 में से 29 सीटों पर जीत दर्ज कर एकतरफा बहुमत हासिल किया है। यहां भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी बिश्नोई की रणनीति को करारा झटका लगा है।
कुल मिलाकर, इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में बोर्ड गठन की प्रक्रिया में जोड़-तोड़ और राजनीतिक सौदेबाजी का दौर देखने को मिलेगा। श्रीडूंगरगढ़ और नापासर में सत्ता की चाबी अब निर्दलीय पार्षदों के हाथों में है, जो भविष्य की राजनीति तय करेंगे।
Author: Thar News Live








