Tharnewslive ब्यूरो: राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ में भारतीय जनता पार्टी को करारा झटका लगा है। झालावाड़ नगर परिषद के 45 वार्डों में से कांग्रेस ने 29 वार्डों पर जीत दर्ज कर अपना दबदबा साबित किया है, जबकि भाजपा केवल 13 वार्डों तक ही सिमट कर रह गई है।
गढ़ में सेंधमारी से भाजपा खेमे में चिंता
झालावाड़ को लंबे समय से वसुंधरा राजे का अभेद्य किला माना जाता रहा है। ऐसे में यहां कांग्रेस की यह बड़ी जीत न केवल स्थानीय स्तर पर सत्ता समीकरण बदलने का संकेत है, बल्कि पार्टी के भीतर भी मंथन का विषय बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनावों के ये परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण लिटमस टेस्ट साबित हो रहे हैं।
स्थानीय निकाय चुनाव सीधे तौर पर जनता की नब्ज टटोलने का जरिया होते हैं। झालावाड़ जैसे क्षेत्रों में परिणाम यह दर्शाते हैं कि मतदाता अब स्थानीय मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
राज्यभर में जारी है मतगणना का दौर
प्रदेश की 309 शहरी स्थानीय निकायों के लिए दो चरणों में हुए मतदान की मतगणना अभी भी जारी है। राज्य के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी दिलचस्प बनी हुई है:
- भाजपा अब तक 1,248 वार्डों में जीत के साथ राज्य में बढ़त बनाए हुए है।
- कांग्रेस 1,065 वार्डों में जीत दर्ज कर भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है।
- निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने भी कई वार्डों में निर्णायक भूमिका निभाई है।
विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल
इन निकाय चुनावों को दोनों प्रमुख दलों के लिए आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। जहां भाजपा अपने पुराने गढ़ों को बचाने की जद्दोजहद में है, वहीं कांग्रेस इन नतीजों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में इन चुनावों के अंतिम परिणाम राज्य की भावी राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
Author: Thar News Live








