गुड़गांव IAF डिपो के पास अवैध कॉलोनियों का जाल: सुप्रीम कोर्ट ने जताई गहरी चिंता

गुड़गांव IAF डिपो के पास अवैध कॉलोनियों का जाल: सुप्रीम कोर्ट ने जताई गहरी चिंता

Tharnewslive ब्यूरो: गुड़गांव स्थित भारतीय वायु सेना (IAF) के गोला-बारूद डिपो के चारों ओर 900 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में अवैध निर्माण का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर इस संवेदनशील क्षेत्र में न केवल रिहायशी घर, बल्कि बहुमंजिला इमारतें, दुकानें और स्कूल तक खड़े हो गए हैं। अदालत ने इस गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

सुरक्षा घेरे में अवैध निर्माण की हकीकत

नियमों के अनुसार, वायु सेना डिपो के 900 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट है। पिछले कुछ वर्षों में इस प्रतिबंधित जोन के भीतर 15 अवैध कॉलोनियां पनप चुकी हैं। यहां पांच से सात मंजिला ऊंची इमारतें सुरक्षा प्रोटोकॉल को चुनौती दे रही हैं। यह स्थिति न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यहां रहने वाले हजारों लोगों के जीवन को भी जोखिम में डालती है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे हैं। अदालत ने जानना चाहा है कि जब स्पष्ट रूप से निर्माण पर रोक थी, तो प्रशासन की नाक के नीचे ये इमारतें कैसे खड़ी हो गईं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थानीय निकायों की विफलता ने इस समस्या को और अधिक जटिल बना दिया है।

फरीदाबाद जैसी चुनौती

यह समस्या केवल गुड़गांव तक सीमित नहीं है। फरीदाबाद स्थित वायु सेना स्टेशन के आसपास भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली है, जहां अवैध अतिक्रमण ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन अवैध निर्माणों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो भविष्य में बड़े सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • IAF डिपो के 900 मीटर के दायरे में निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध है।
  • क्षेत्र में 15 अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं।
  • बहुमंजिला इमारतों और स्कूलों का संचालन सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
  • अधिकारियों की मिलीभगत और ढिलाई के कारण अतिक्रमण का दायरा बढ़ता गया।

फिलहाल, स्थानीय प्रशासन पर दबाव है कि वह इन अवैध निर्माणों को हटाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करे। हालांकि, हजारों परिवारों के विस्थापन का मुद्दा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Thar News Live
Author: Thar News Live

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