Tharnewslive ब्यूरो: केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस बात पर गंभीरता से विचार कर रही है कि क्या एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन व्यवसाय में उतरने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब अडानी समूह, जो वर्तमान में मुंबई सहित कई प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करता है, ने नियमों में संशोधन की मांग की।
नियमों में बदलाव की संभावना और चुनौतियां
नायडू ने कहा कि सरकार इस मामले के हर पहलू का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। इसमें सबसे बड़ी चिंता ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) की है। यदि कोई कंपनी हवाई अड्डे का संचालन करती है और उसी की एयरलाइन भी वहां से उड़ान भरती है, तो अन्य एयरलाइनों के लिए समान अवसर (Level Playing Field) सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
सरकार का प्राथमिक उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। हम किसी भी नीतिगत बदलाव से पहले सभी हितधारकों के साथ परामर्श कर रहे हैं ताकि बाजार में निष्पक्षता बनी रहे।
प्रमुख बिंदु
- अडानी समूह ने एयरपोर्ट और एयरलाइन संचालन के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।
- सरकार प्रतिस्पर्धा आयोग और अन्य नियामक निकायों के साथ मिलकर इसके नफा-नुकसान का आकलन कर रही है।
- नागरिक उड्डयन मंत्रालय का जोर इस बात पर है कि एकाधिकार की स्थिति उत्पन्न न हो।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो विमानन क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, मंत्रालय ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। नायडू ने संकेत दिए हैं कि किसी भी निर्णय से पहले पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
Author: Thar News Live








