Tharnewslive ब्यूरो: भारतीय वायु सेना (IAF) एक बार फिर वैश्विक रक्षा मंच पर अपनी धाक जमाने के लिए तैयार है। राजस्थान के थार रेगिस्तान का आसमान जल्द ही दुनिया के सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों की गर्जना से गूंजने वाला है। भारतीय वायु सेना का बहुप्रतीक्षित बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ न केवल भारत की सामरिक क्षमता को प्रदर्शित करेगा, बल्कि यह वैश्विक सैन्य सहयोग का एक नया अध्याय भी लिखेगा।
40 देशों की भागीदारी से बढ़ेगी ताकत
इस मेगा युद्धाभ्यास में दुनिया भर के करीब 40 देशों की वायु सेनाएं हिस्सा लेंगी। यह अभ्यास न केवल संख्या के लिहाज से बड़ा है, बल्कि इसमें शामिल होने वाले विमानों और तकनीक के स्तर पर भी यह अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी आयोजन माना जा रहा है। राजस्थान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एयरबेस से संचालित होने वाला यह अभ्यास भारतीय वायु सेना के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी मजबूती देगा।
युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य
तरंग शक्ति का मुख्य उद्देश्य मित्र देशों के साथ तालमेल बिठाना, युद्ध कौशल का आदान-प्रदान करना और जटिल हवाई अभियानों में एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझना है। इसमें वायु-से-वायु युद्ध, लंबी दूरी की मारक क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘तरंग शक्ति’ जैसा आयोजन भारत की बढ़ती वैश्विक सैन्य साख का प्रतीक है। यह न केवल हमारी परिचालन तैयारियों को परखने का मौका है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।
प्रमुख आकर्षण और विशेषताएं
- 40 देशों की वायु सेनाओं का अभूतपूर्व समागम।
- स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस और प्रचंड हेलीकॉप्टरों का प्रदर्शन।
- जटिल हवाई युद्ध परिदृश्यों का वास्तविक अभ्यास।
- विभिन्न देशों के बीच सैन्य कूटनीति और आपसी विश्वास को बढ़ावा।
यह युद्धाभ्यास न केवल भारतीय वायु सेना के पायलटों के लिए एक सीखने का अनुभव होगा, बल्कि यह दुनिया को यह संदेश भी देगा कि भारत किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। राजस्थान का रेगिस्तान आने वाले दिनों में वैश्विक सैन्य शक्ति का केंद्र बिंदु बना रहेगा।
Author: Thar News Live








