Tharnewslive ब्यूरो: आईआईटी बॉम्बे में बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की दुखद आत्महत्या के बाद संस्थान में हड़कंप मचा हुआ है। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए, आईआईटी बॉम्बे के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को तत्काल प्रभाव से छुट्टी पर जाने का निर्देश दिया है। यह कदम उन आरोपों के बाद उठाया गया है जिनमें छात्र के साथ दुर्व्यवहार और मानसिक दबाव की बातें सामने आई थीं।
जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन
संस्थान प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम की तह तक जाने के लिए एक 10 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों, शैक्षणिक दबाव और अन्य संभावित कारणों की बारीकी से जांच करेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष होगी।
विभिन्न आईआईटी के फैकल्टी निकायों की मांग
इस घटना ने न केवल आईआईटी बॉम्बे बल्कि देश भर के अन्य आईआईटी परिसरों में भी चिंता की लहर दौड़ा दी है। विभिन्न आईआईटी के फैकल्टी निकायों ने एकजुट होकर इस मामले में एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका मानना है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक वातावरण को लेकर कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
आईआईटी के फैकल्टी निकायों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि जांच समिति बिना किसी बाहरी दबाव के सच को सामने लाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
प्रमुख बिंदु:
- प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजा गया।
- 10 सदस्यीय समिति मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
- देश भर के आईआईटी फैकल्टी निकायों ने निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की है।
- छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक तनाव का मुद्दा फिर से चर्चा में है।
फिलहाल, आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने किसी भी तरह की कोताही न बरतने का आश्वासन दिया है। छात्र समुदाय में व्याप्त आक्रोश को देखते हुए परिसर में सुरक्षा और संवाद के नए तरीके अपनाने पर भी विचार किया जा रहा है।
Author: Thar News Live








