Tharnewslive विशेष कवरेज: भारतीय रेलवे का मुंबई सेंट्रल डिवीजन अपनी उत्कृष्ट यात्री सेवाओं और तकनीकी उन्नयन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के मोर्चे पर भी लगातार मील के पत्थर स्थापित कर रहा है। इसी कड़ी में हाल ही में पश्चिमी रेलवे के अंतर्गत आने वाले इस महत्वपूर्ण डिवीजन ने ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत एक अत्यंत व्यापक और प्रभावशाली स्वच्छता ड्राइव का सफलतापूर्वक संचालन किया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य रेलवे परिसरों, स्टेशनों, पटरियों और डिपो में साफ-सफाई के स्तर को और अधिक सुदृढ़ करना तथा आम नागरिकों एवं रेल यात्रियों के बीच स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना था। प्रशासनिक स्तर पर की गई इस कठोर और सुनियोजित पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जनसहभागिता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के मेल से किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)
- मुंबई सेंट्रल डिवीजन द्वारा 21 से 24 सितंबर के बीच चार दिवसीय विशेष स्वच्छता महाअभियान का सफल आयोजन किया गया।
- अभियान के दौरान रेलवे परिसरों और पटरियों से कुल 10 टन से अधिक कचरा सफलतापूर्वक एकत्र कर उसका वैज्ञानिक निस्तारण किया गया।
- रेलवे कर्मचारियों, सफाई कर्मियों और जागरूक यात्रियों ने इस महाअभियान में स्वतःस्फूर्त तरीके से अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
- सूरत कोच केयर सेंटर पर विशेष रूप से लक्षित सफाई अभियान चलाकर ट्रेनों के डिब्बों और रखरखाव यार्ड की स्थिति को सुधारा गया।
- स्थानीय निवासियों और आसपास के परिवारों को कचरा पृथक्करण और घरेलू कंपोस्टिंग के बारे में शिक्षित करने के लिए आउटरीच गतिविधियां चलाई गईं।
पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)
स्वच्छ भारत मिशन की तर्ज पर शुरू किए गए ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत मुंबई सेंट्रल डिवीजन ने कमर कसते हुए 21 सितंबर से 24 सितंबर के बीच एक हाई-इंटेंसिटी क्लीनliness ड्राइव की रूपरेखा तैयार की थी। इस चार दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई, जिसमें हर स्तर के रेलवे कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अभियान का दायरा केवल रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्मों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि पटरियों के किनारे, ट्रेन के डिब्बों, पार्किंग क्षेत्रों, फुट ओवर ब्रिज और कार्यालय परिसरों को भी इसके दायरे में शामिल किया गया था।
इन चार दिनों की अवधि में रेलवे की समर्पित टीमों ने दिन-रात मेहनत करके कुल 10 टन से ज्यादा ठोस और अन्य प्रकार के कचरे को एकत्र किया। रेलवे ट्रैक के आस-पास जमे वर्षों पुराने कचरे और प्लास्टिक को हटाया गया, जिससे पर्यावरण प्रदूषण पर लगाम लगाने में मदद मिली। इस अभियान का एक सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु सूरत कोच केयर सेंटर रहा, जहां तकनीकी कर्मचारियों और स्वच्छता कर्मियों ने मिलकर विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। यहां ट्रेनों के डिब्बों की गहन सफाई, धुलाई और कीट नियंत्रण का काम युद्धस्तर पर किया गया ताकि यात्रियों को पूरी तरह से स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
सिर्फ पटरियों और स्टेशनों की सफाई तक ही यह अभियान सीमित नहीं रहा, बल्कि रेलवे ने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करते हुए जन-जागृति अभियान भी चलाए। रेलवे कॉलोनियों और आसपास के स्थानीय रिहायशी इलाकों में विशेष आउटरीच प्रोग्राम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विशेषज्ञों ने स्थानीय परिवारों को सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करने (वेस्ट सेग्रिगेशन) के तरीकों की जानकारी दी। इसके अलावा, घरों में ही जैविक कचरे से खाद बनाने यानी होम कंपोस्टिंग की तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया, ताकि लोग पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपना सकें।
मुख्य सवाल और उनके जवाब (Key Questions & Answers)
सवाल 1: इस स्वच्छता अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या था?
जवाब: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मुंबई सेंट्रल डिवीजन के अंतर्गत आने वाले सभी रेलवे स्टेशनों, डिपो और पटरियों पर स्वच्छता के स्तर को बढ़ाना और यात्रियों एवं आम जनता को कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था।
सवाल 2: अभियान के दौरान कुल कितना कचरा एकत्र किया गया?
जवाब: चार दिनों (21 से 24 सितंबर) के भीतर रेलवे कर्मियों और यात्रियों के सहयोग से 10 टन से अधिक कचरा एकत्र किया गया।
सवाल 3: क्या इस अभियान में आम नागरिकों को भी जोड़ा गया था?
जवाब: हां, रेलवे ने स्थानीय परिवारों और यात्रियों के साथ आउटरीच गतिविधियां आयोजित कीं, जिसमें उन्हें कचरा पृथक्करण और होम कंपोस्टिंग का प्रशिक्षण दिया गया।
भारतीय रेलवे केवल परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि देश के सामाजिक ताने-बाने और स्वच्छता संस्कृति का एक मजबूत स्तंभ है। हमारे कर्मचारियों और यात्रियों का यह सामूहिक प्रयास आने वाले समय में एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।
समापन और निष्कर्ष (Conclusion)
मुंबई सेंट्रल डिवीजन द्वारा चलाया गया यह चार दिवसीय स्वच्छता अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा में सुनियोजित प्रयास किए जाएं, तो बड़े बदलाव संभव हैं। 10 टन से अधिक कचरे का संकलन और स्थानीय नागरिकों तक जागरूकता का प्रसार यह दर्शाता है कि रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुविधाओं और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस तरह के अभियान न केवल रेलवे स्टेशनों को साफ-सुथरा रखते हैं, बल्कि समाज में स्वच्छता के प्रति एक स्थाई संस्कृति का भी निर्माण करते हैं, जो राष्ट्र विकास के लिए बेहद आवश्यक है।
Author: Thar News Live








