बिना ऑर्डर किए आ रहे हैं कैश ऑन डिलीवरी पार्सल? हो जाएं सावधान, यह है खतरनाक स्कैम

बिना ऑर्डर किए आ रहे हैं कैश ऑन डिलीवरी पार्सल? हो जाएं सावधान, यह है खतरनाक स्कैम

Tharnewslive ग्राउंड रिपोर्ट: जयपुर सहित देश भर के कई शहरों में इन दिनों एक नया और शातिर डिजिटल फ्रॉड तेजी से पैर पसार रहा है, जिसमें लोगों को बिना किसी ऑर्डर के कैश ऑन डिलीवरी (COD) पार्सल भेजे जा रहे हैं। ठगों का यह नया गिरोह नागरिकों की निजी जानकारियों जैसे नाम, मोबाइल नंबर और पते का अवैध इस्तेमाल कर उनके घर सस्ते या बेकार सामान के पार्सल भेज रहा है, जिसके एवज में डिलीवरी बॉय द्वारा पैसे वसूले जाते हैं। लोग अक्सर ऑनलाइन शॉपिंग की व्यस्तता के कारण यह सोचकर भुगतान कर देते हैं कि यह उनके किसी परिजन या खुद उनके द्वारा बुक किया गया सामान है, लेकिन जब पैकेट खुलता है तो उसमें से बेहद घटिया क्वालिटी का सामान या कूड़ा-कचरा निकलता है। इस संगठित ठगी ने आम उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं और साइबर सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस भी इस पर कड़ी नजर रख रही है। हमारी इस विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि कैसे यह घोटाला काम कर रहा है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • लोगों के नाम, पते और फोन नंबर का अवैध रूप से डेटाबेस तैयार कर इस फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा है।
  • पार्सल में आमतौर पर बहुत ही कम कीमत के चाइनीज गैजेट्स, प्लास्टिक का कचरा या नकली आभूषण निकलते हैं।
  • ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स पर कोई रिकॉर्ड न होने के कारण पीड़ितों के लिए रिफंड या शिकायत दर्ज करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
  • डिलीवरी एजेंट भी अक्सर अनजान होते हैं क्योंकि वे केवल थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक कंपनियों के जरिए पार्सल लेकर आते हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा लीक या डेटा चोरी का एक बड़ा परिणाम है, जिसकी गहन जांच की आवश्यकता है।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

इस प्रकार के घोटालों की शुरुआत तब होती है जब किसी उपभोक्ता के मोबाइल पर अचानक एक अनजान नंबर से मैसेज आता है कि उनका पार्सल रास्ते में है और उसके लिए नकद भुगतान करना होगा। जब डिलीवरी एजेंट घर पहुंचता है, तो परिवार का कोई सदस्य बिना यह सोचे कि उन्होंने कोई आर्डर दिया था या नहीं, पार्सल स्वीकार कर लेता है और छोटी-मोटी रकम (जैसे 299 से 999 रुपये) का भुगतान कर देता है। शुरुआत में लोगों को यह एक छोटी राशि लगती है इसलिए वे पुलिस में जाने से बचते हैं, लेकिन जब ऐसा बार-बार होने लगता है और उन्हें समझ आता है कि वे एक बड़े जाल का शिकार बन चुके हैं, तब तक ठग करोड़ों रुपये ऐंठ चुके होते हैं। हाल ही में जयपुर के कई पॉश इलाकों में इस तरह के मामले सामने आए हैं जहां रेजिडेंट्स ने सामूहिक रूप से स्थानीय थानों में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। जांच में सामने आया है कि इन पार्सल के ऊपर भेजने वाले का पता या तो फर्जी होता है या फिर किसी बंद पड़ी कूरियर कंपनी का नाम लिखा होता है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना पुलिस के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

स्थानीय पुलिस प्रशासन और साइबर सेल ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी अनजान सीओडी पार्सल को तब तक स्वीकार न करें जब तक आपको उसकी पूरी पुष्टि न हो जाए। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि उनके निजी डेटा की सुरक्षा खतरे में है और कोई भी आसानी से उनके घर तक सामान भेजकर उन्हें ठग रहा है। कई आरडब्ल्यूए (Resident Welfare Associations) ने अपनी सोसाइटियों में नोटिस चस्पा कर दिए हैं कि वे अपने गार्ड्स को निर्देश दें कि बिना वेरीफाई किए किसी भी अज्ञात सीओडी पार्सल को अंदर न आने दें।

स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया, ‘मेरे घर पर एक दिन अचानक एक पार्सल आया जिसके लिए मेरी पत्नी ने 499 रुपये दे दिए। जब हमने डिब्बा खोला तो अंदर प्लास्टिक के कुछ टूटे हुए टुकड़े मिले। जब मैंने अपनी शॉपिंग हिस्ट्री चेक की तो ऐसा कोई ऑर्डर ही नहीं था। यह साफ तौर पर एक बड़ा स्कैम है जिससे हर किसी को सतर्क रहने की जरूरत है।’

आगे क्या? (What Lies Ahead)

इस प्रकार के पार्सल स्कैम से निपटने के लिए अब उपभोक्ताओं को खुद अत्यधिक सतर्क और जागरूक होने की आवश्यकता है। भविष्य में इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए साइबर एक्सपर्ट्स ई-कॉमर्स कंपनियों और लॉजिस्टिक फर्म्स से डेटा प्राइवेसी को और अधिक मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। यदि आपको भी ऐसा कोई संदिग्ध पार्सल मिले, तो तुरंत डिलीवरी लेने से मना कर दें और अपने परिवार के सभी सदस्यों को इसके बारे में सूचित करें ताकि कोई भी इस शातिर जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई न गंवाए। प्रशासन भी इस नेटवर्क के सरगनाओं तक पहुंचने के लिए तकनीकी सर्विलांस का सहारा ले रहा है ताकि जल्द ही इस अवैध रैकेट का पर्दाफाश किया जा सके।

Thar News Live
Author: Thar News Live

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