Tharnewslive ग्राउंड रिपोर्ट: दीपोत्सव के पावन पर्व और त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े गुलाबी शहर जयपुर के ऐतिहासिक किशनपोल बाजार इलाके में एक बार फिर से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। दिवाली से ठीक पहले नगर निगम के हूपर चालकों और सफाई कर्मचारियों द्वारा अचानक काम का बहिष्कार करने के कारण पूरे क्षेत्र में कचरे के अंबार लग गए हैं। त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और खरीदारी के बीच कचरा उठान न होने से स्थानीय दुकानदारों, व्यापारियों और खरीदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रही इन हड़तालों से स्थानीय प्रशासन और आम जनता की चिंताएं काफी हद तक बढ़ गई हैं, क्योंकि इस समय बाजारों में साफ-सफाई सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए थी।
ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)
- किशनपोल बाजार और आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों में हूपर चालकों की बार-बार हो रही हड़ताल से सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
- दिवाली की खरीदारी के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ के बीच सड़कों और गलियों में कचरे के ढेर लग गए हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।
- व्यापारी संगठनों ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर लाचारी का आरोप लगाते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग उठाई है।
- कर्मचारियों का कहना है कि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों और मानदेय के भुगतान पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा है।
- प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)
दिवाली से महज कुछ दिन पहले उपजे इस सफाई संकट की शुरुआत उस समय हुई जब किशनपोल जोन के अंतर्गत आने वाले कचरा संग्रहण हूपर वाहनों के चालकों ने सुबह के समय अपनी गाड़ियां डिपो पर ही खड़ी कर दीं। कर्मचारियों ने पिछले कई महीनों से वेतन भुगतान में हो रही देरी और अन्य प्रशासनिक विसंगतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सुबह का समय बाजारों की सफाई और कचरा उठाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन हूपर के न आने के कारण दुकानों के बाहर और मुख्य मार्गों पर कचरे के डिब्बे ओवरफ्लो होने लगे। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोलीं तो उनके सामने दुकानों के आगे कचरे के ढेर मिले। स्थानीय व्यापार मंडल ने तुरंत नगर निगम के स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन शुरुआती घंटों में कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर रोष और अधिक बढ़ गया। दोपहर होते-होते यह विरोध प्रदर्शन अन्य उप-क्षेत्रों में भी फैलने की आशंका पैदा हो गई, जिससे जयपुर नगर निगम के मुख्यालय में भी हड़कंप मच गया। उच्च अधिकारियों को तुरंत हरकत में आना पड़ा और पुलिस बल को भी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात करना पड़ा ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)
इस पूरे घटनाक्रम पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने का दावा किया है। निगम आयुक्त का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है और कुछ तकनीकी कारणों से भुगतान में मामूली देरी हुई थी जिसे तुरंत दूर कर दिया गया है। हालांकि, स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। त्योहारी सीजन के इस संवेदनशील समय में गंदगी के कारण ग्राहकों का बाजार में आना मुश्किल हो रहा है।
हम दिवाली के इस बड़े पर्व पर अपने व्यापार को लेकर बेहद उत्साहित थे, लेकिन नगर निगम की इस लापरवाही और हूपर चालकों की हड़ताल ने हमारी सारी तैयारियां पर पानी फेर दिया है। दुकानों के आगे कचरा सड़ रहा है और ग्राहक आने से कतरा रहे हैं। प्रशासन को तुरंत इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। – स्थानीय व्यापार मंडल प्रतिनिधि
आगे क्या? (What Lies Ahead)
आगामी दिनों में धनतेरस और दीपावली के मुख्य त्योहारों को देखते हुए इस संकट का तुरंत समाधान निकाला जाना बेहद आवश्यक है। नगर निगम प्रशासन ने वैकल्पिक तौर पर अतिरिक्त सफाई कर्मियों और वाहनों को किशनपोल बाजार में तैनात करने के निर्देश जारी किए हैं ताकि युद्ध स्तर पर कचरे का उठान किया जा सके। यदि कर्मचारी संगठनों और निगम प्रशासन के बीच वार्ता सफल रहती है, तो शाम तक व्यवस्था पटरी पर लौटने की उम्मीद है। अन्यथा, यह आंदोलन और अधिक तूल पकड़ सकता है, जिससे शहर की स्वच्छता रैंकिंग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली दोनों पर बड़ा सवालिया निशान लग जाएगा। आने वाले 48 घंटे जयपुर की सफाई व्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं।
Author: Thar News Live







