जनगणना 2027: 14 नए सवालों पर घमासान, क्या एनपीआर के लिए ‘बैकडोर’ का इस्तेमाल कर रही सरकार?

जनगणना 2027: 14 नए सवालों पर घमासान, क्या एनपीआर के लिए 'बैकडोर' का इस्तेमाल कर रही सरकार?

जनगणना 2027 की शुरुआत और नए सवालों का विवाद

भारत में दशकीय जनगणना की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। लद्दाख और देश के अन्य दुर्गम बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना का काम शुरू हो चुका है। हालांकि, इस बार की जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गई है। जनगणना प्रश्नावली में शामिल किए गए 14 नए सवालों ने विपक्ष की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आलोचकों का तर्क है कि इन सवालों के माध्यम से सरकार नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) के लिए डेटा जुटाने का ‘बैकडोर’ रास्ता अपना रही है।

विपक्ष की चिंताएं और एनपीआर का मुद्दा

विपक्षी दलों का आरोप है कि जनगणना के दौरान पूछे जा रहे कुछ नए प्रश्न सीधे तौर पर एनपीआर की प्रक्रिया से मेल खाते हैं। उनका मानना है कि सरकार जनगणना की आड़ में नागरिकों की ऐसी जानकारी एकत्र कर रही है, जिसका उपयोग भविष्य में नागरिकता सत्यापन या एनआरसी (NRC) के लिए किया जा सकता है। tharnewslive.com की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इन सवालों को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी असंतोष है और इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जा रहा है।

tharnewslive.com संवाददाता के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि जनगणना का उद्देश्य केवल सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सटीक डेटा जुटाना है और जनगणना अधिनियम के तहत नागरिकों की निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित है।

जनगणना अधिनियम और कानूनी सुरक्षा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत एकत्र की गई जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। कानून के अनुसार, जनगणना के दौरान प्राप्त व्यक्तिगत डेटा का उपयोग किसी भी प्रकार के कानूनी या प्रशासनिक उत्पीड़न के लिए नहीं किया जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सुरक्षा कानूनों के अभाव में नागरिकों के मन में अपनी जानकारी साझा करने को लेकर डर बना हुआ है।

प्रमुख बिंदु और संभावित प्रभाव

  • जनगणना 2027 में 14 नए सवालों को शामिल किया गया है, जो सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर केंद्रित हैं।
  • विपक्ष का दावा है कि यह एनपीआर के लिए एक गुप्त मार्ग है, जिससे नागरिकता पर सवाल उठ सकते हैं।
  • सरकार ने जनगणना अधिनियम के तहत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
  • लद्दाख और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो आने वाले समय में पूरे देश में लागू होगी।

अंततः, यह जनगणना न केवल भारत की जनसंख्या के बदलते स्वरूप को दर्शाएगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचेगा। अब देखना यह है कि सरकार विपक्ष की चिंताओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है।

Thar News Live
Author: Thar News Live

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