tharnewslive.com ब्यूरो: राजस्थान की राजधानी जयपुर में चुनावी फिजा बदल रही है। दशकों से चले आ रहे चुनाव प्रचार के पारंपरिक तरीकों को अब नई पीढ़ी यानी जेन-जेड (Gen Z) ने सिरे से खारिज करना शुरू कर दिया है। शहर की सड़कों पर सुबह 7 बजे से गूंजने वाले लाउडस्पीकर और गाड़ियों के भारी-भरकम काफिले अब युवाओं की नाराजगी का कारण बन रहे हैं।
डिजिटल युग में शोर-शराबे की जगह नहीं
जयपुर के युवा मतदाताओं का मानना है कि लाउडस्पीकर और सड़कों पर जाम लगाने वाली रैलियां अब बीते जमाने की बातें हैं। सोशल मीडिया के दौर में पले-बढ़े ये युवा अब सीधे संवाद और डिजिटल कैंपेन को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका तर्क है कि चुनाव प्रचार का मतलब शांति भंग करना नहीं, बल्कि मुद्दों पर चर्चा करना होना चाहिए।
चुनाव प्रचार के नाम पर सुबह-सुबह शोर मचाना न केवल असभ्य है, बल्कि यह मतदाताओं की निजता का भी उल्लंघन है। हम अब ऐसे उम्मीदवारों को देखना चाहते हैं जो सोशल मीडिया पर हमारे सवालों का जवाब दें, न कि सड़कों पर गाड़ियों का काफिला लेकर शक्ति प्रदर्शन करें।
एक स्थानीय कॉलेज छात्र ने अपना नाम न छापने की शर्त पर यह बात कही। जयपुर के विभिन्न इलाकों में अब युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) पर प्रत्याशियों के घोषणापत्रों को बारीकी से खंगाल रहे हैं।
बदलाव के मुख्य कारण
- शोर प्रदूषण से चिढ़: सुबह की नींद में खलल डालने वाले लाउडस्पीकर युवाओं के लिए अब एक बड़ी समस्या बन गए हैं।
- पर्यावरण के प्रति जागरूकता: गाड़ियों के लंबे काफिले से होने वाले प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को लेकर युवा पीढ़ी बेहद संवेदनशील है।
- डिजिटल साक्षरता: युवा अब रैलियों के बजाय ऑनलाइन डिबेट और क्यूएंडए (Q&A) सत्रों में अधिक रुचि ले रहे हैं।
- समय का महत्व: भागदौड़ भरी जिंदगी में युवा अब समय की बर्बादी करने वाले पारंपरिक प्रचार से दूर रहना चाहते हैं।
राजनीतिक दलों के लिए नई चुनौती
जयपुर के राजनीतिक गलियारों में भी इस बदलाव की चर्चा तेज है। कई युवा नेता अब अपने प्रचार के तरीकों में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। वे अब लाउडस्पीकर के बजाय पॉडकास्ट, इंस्टाग्राम लाइव और डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स के जरिए युवाओं तक पहुंचने की रणनीति बना रहे हैं। यह स्पष्ट है कि जयपुर का युवा अब पुराने ढर्रे पर चलने वाले नेताओं को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
Author: Thar News Live







