थार न्यूज़ लाइव शंकर लाल रेवाड़िया/जयपुर राजस्थान विधानसभा में आयोजित प्रश्न एवं संदर्भ समिति की बैठक में शिव विधानसभा क्षेत्र से विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कृषि से जुड़े अनेक गंभीर, जमीनी और नीतिगत मुद्दों को मजबूती से समिति के समक्ष उठाया। बैठक के दौरान विधायक भाटी ने स्पष्ट किया कि शिव एवं बाड़मेर जैसे कृषि-प्रधान क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक संरचना और संसाधनों की भारी कमी के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पटवारियों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कृषि विभाग के कुछ कार्मिकों की मिलीभगत से अनियमितताएं की जा रही हैं, जिससे किसानों को बीमा लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने इस पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच की मांग की।उन्होंने खेत तारबंदी योजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्तमान में 400 रनिंग मीटर तारबंदी पर दिया जा रहा ₹40,000 का अनुदान वास्तविक लागत (₹1.20 लाख से अधिक) के मुकाबले बेहद अपर्याप्त है, जिसके कारण किसान इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। भाटी ने अनुदान राशि बढ़ाने की मांग की।बैठक में विधायक भाटी ने कृषि विभाग में रिक्त पदों की गंभीर समस्या को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सहायक कृषि अधिकारी (AAO), कृषि पर्यवेक्षक एवं उद्यान विभाग से जुड़े अनेक पद वर्षों से रिक्त हैं, जिससे योजनाओं का लाभ किसानों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। एक-एक कृषि पर्यवेक्षक पर 8–10 ग्राम पंचायतों का भार होने से क्षेत्रीय निगरानी और मार्गदर्शन प्रभावित हो रहा है।उन्होंने बाड़मेर जिले में कृषि विभाग के लिए केवल एक ही सहायक निदेशक होने को अत्यंत अपर्याप्त बताते हुए शिव, गडरारोड, रामसर, चौहटन और भीयाड क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त सहायक निदेशक कार्यालय सृजित करने की मांग रखी। साथ ही शिव मुख्यालय पर उद्यान विभाग के लिए कार्यालय भवन के निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।विधायक भाटी ने बजट घोषणाओं से जुड़ी योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ₹210 करोड़ की लागत से प्रस्तावित 1000 कस्टम हायरिंग सेंटर्स तथा 50 करोड़ की लागत से स्थापित किए जाने वाले Centre for Excellence of Artificial Intelligence in Agriculture की वर्तमान स्थिति, व्यय और देरी के कारणों की विस्तृत जानकारी मांगी।उन्होंने कृषक संवाद कार्यक्रमों की संख्या में आई भारी कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि संवाद की कमी के कारण किसानों की समस्याएं नीति-निर्माण तक नहीं पहुंच पा रहीं। साथ ही उन्होंने जंगली सूअरों से फसल नुकसान, ट्यूबवेल जल संरक्षण के लिए स्वीकृत योजनाओं की कमी, तथा शिव में निर्मित कृषि मंडी के अब तक चालू न हो पाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने शिव क्षेत्र में कृषि महाविद्यालय की स्थापना की मांग करते हुए कहा कि इसके अभाव में युवाओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, शोध और प्रशिक्षण की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने कृषि यंत्रों पर सब्सिडी प्रक्रिया को सरल करने, भुगतान में हो रही अत्यधिक देरी को समाप्त करने तथा कृषि पर्यवेक्षकों को हार्ड ड्यूटी व अतिरिक्त भत्ते देने की मांग भी रखी। बैठक में गंभीर विषय कीटनाशकों के अनियंत्रित उपयोग से जुड़ा मुद्दा भी उठाया। विधायक भाटी ने समिति के समक्ष आंकड़े रखते हुए बताया कि लगभग 99% किसान बिना सुरक्षा किट और प्रशिक्षण के कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, जिससे किसानों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने राज्य स्तर पर स्पष्ट नीति, अनिवार्य प्रशिक्षण, सुरक्षा किट पर अनुदान और कीटनाशक बिक्री की निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की।अंत में विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि ये सभी मुद्दे केवल शिव या बाड़मेर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के कृषि तंत्र से सीधे जुड़े हुए हैं। उन्होंने समिति एवं संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि इन विषयों पर शीघ्र ठोस निर्णय लेकर किसानों के हित में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
Author: Thar News Live


