शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी का सदन में सीधा वार—पेपर लीक, उजड़ती शिक्षा और युवाओं के सपनों पर हो रहे संगठित विश्वासघात

थार न्यूज़ लाइव शंकर लाल रेवाड़िया जयपुर/शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने सशक्त, आक्रामक एवं तथ्यपरक वक्तव्य में प्रदेश के युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर सरकार व सिस्टम की गंभीर विफलताओं को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजस्थान युवाओं का प्रदेश है, किंतु दुर्भाग्यवश वर्षों से युवा अपने भविष्य के साथ हो रहे संगठित विश्वासघात के शिकार बन रहे हैं।भाटी ने कहा कि पेपर लीक कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि वर्षों से चला आ रहा एक सुनियोजित अपराध है। प्रश्न उठाते हुए उन्होंने कहा—आख़िर इन पेपर लीक का जिम्मेदार कौन है? युवा अभी इस दंश से उबर भी नहीं पाए थे कि ओएमआर शीट से जुड़ा नया प्रकरण सामने आ गया। यह युवाओं के सपनों और उनके विश्वास के साथ खुला धोखा है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं के दौरान बहनों के मंगलसूत्र उतरवाए जाते हैं, उनकी चोटियाँ काटी जाती हैं, सिख भाइयों की पगड़ियाँ उतरवाई जाती हैं—और समाज मजबूरी में यह सब सहता है, सिर्फ़ इस उम्मीद में कि काश पेपर लीक रुक जाए। पर जब “बाड़ ही खेत को खाएगी, तो बचाएगा कौन?”विधायक भाटी ने आगाह किया कि यह न समझा जाए कि युवा सब कुछ नहीं देख रहा। वह सदन में बैठे हर माननीय की गंभीरता और संवेदनशीलता को परख रहा है। इसी क्रम में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए कहा— “जिन हाथों में शक्ति भरी है राजतिलक देने की, उन्हीं हाथों में शक्ति भरी है सिर उतार लेने की।” भाटी ने मांग की कि पेपर लीक जैसे विषयों पर सदन में शीघ्र विशेष चर्चा आयोजित हो और समस्त तथ्यों को प्रदेश की जनता के सामने रखा जाए।इसके साथ ही उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में खेजड़ी संवर्धन, ओरण और गोचर संरक्षण से संबंधित संशोधन प्रस्ताव भी सदन में प्रस्तुत किया और इन विषयों को पर्यावरणीय संतुलन व ग्रामीण आजीविका से जोड़ते हुए प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए भाटी ने विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता के वक्तव्य को उद्धृत किया, जिसमें प्रदेश में डेढ़ लाख शिक्षकों की कमी, 3700 जर्जर स्कूल, 80 हजार कक्षों और 44 हजार शौचालयों की आवश्यकता बताई गई थी। उन्होंने तीखा सवाल किया कि जब पूर्ववर्ती सरकार में वही नेता शिक्षा मंत्री थे और वर्तमान सरकार अभी नई है, तो इन समस्याओं का समाधान कब होगा? क्या इसी तरह 2047 तक आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा?भाटी ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय तक को यह कहना पड़ा कि शर्म आनी चाहिए कि छात्राएँ स्कूलों में पानी नहीं पीतीं क्योंकि वहाँ शौचालय नहीं हैं। एक ओर हम आज़ादी का अमृत काल मना रहे हैं, दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि सदन के अधिकांश माननीय सरकारी स्कूलों से पढ़कर आए हैं, फिर भी आज उन्हीं स्कूलों की हालत दयनीय है—कहीं स्कूल गिर रहे हैं, कहीं मासूम बच्चे इस व्यवस्था की भेंट चढ़ रहे हैं और हम मूकदर्शक बने हुए हैं।उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर का उद्धरण देते हुए कहा— “शिक्षा उस शेरनी का दूध है, जो जितना पीता है उतना दहाड़ता है।” भाटी ने प्रश्न किया कि क्या इसी तरह हम तक्षशिला और नालंदा का निर्माण करेंगे? क्या इसी तरह विश्वगुरु बनेंगे, जहाँ बारहवीं तक का स्कूल एक शिक्षक के भरोसे छोड़ दिया गया है?भविष्य की पीढ़ियों की चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि हम गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की बातें करते हैं, पर आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि हर जगह यह चर्चा है कि सत्ता और विपक्ष मिलकर सरकारी सिस्टम को कमजोर करने में लगे रहते हैं, ताकि कोई वंचित, पीड़ित या शोषित आगे बढ़कर इस सदन का हिस्सा न बन सके।शिक्षा सुधार के लिए भाटी ने एक कठोर लेकिन निर्णायक सुझाव रखा—यदि वास्तव में हम चाहते हैं कि ग्रामीण सरकारी स्कूल से पढ़ा बच्चा भी इस सदन तक पहुँचे, तो शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि एक कानून लाया जाए, जिसमें पंच से लेकर सांसद तक और सभी अधिकारियों के बच्चे अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में पढ़ें। यदि मुख्यमंत्री ऐसा नियम लाते हैं, तो वे पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज शिक्षा व्यवस्था पर इसलिए ध्यान नहीं दिया जा रहा क्योंकि हमारे बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ते; वहाँ गरीब, वंचित और शोषित वर्ग के बच्चे हैं, इसलिए व्यवस्था की अनदेखी हो रही है।अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने कहा—“हुक्मरानों ने फरमाया है कि नारों से बदलता है ज़माना,सियासतदार कहते हैं सियासतें बदले तो बदलता है ज़माना,लेकिन मिज़ाज-ए-जहाँ बदलने के लिए इतना काफ़ी नहीं,बदलने वाला खुद बदले, तो बदलता है ज़माना।”उन्होंने पक्ष और विपक्ष से आह्वान किया कि युवाओं के भविष्य की नींव को मजबूत करें।प्रश्नकाल के दौरान, शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने शिव विधानसभा क्षेत्र की खस्ताहाल सड़कों की गंभीर स्थिति पर सदन का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने क्षेत्रवासियों को हो रही असुविधा, यातायात बाधाओं और जनसुरक्षा से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया।जनहित को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने गूंगा–हड़वा–हड़वेचा–स्वामी का गाँव रोड, शिव–कोटड़ा–नांद रोड, बालेबा–जालिपा–हरसाणी रोड, हाथमा–सियानी–रेड़ाना रोड तथा हरसाणी–झणकली–फतेहगढ़ रोड सहित पाँच प्रमुख सड़कों की मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और स्थायी समाधान की आवश्यकता पर स्पष्ट पक्ष रखा। इस संबंध में उन्होंने उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के समक्ष भी विषय रखकर सुरक्षित, सुगम और बेहतर आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की।
Thar News Live
Author: Thar News Live

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