थार न्यूज़ लाइव शंकर लाल रेवाड़िया/जयपुर /विधानसभा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संबोधन के बाद मीडिया से बातचीत में खेजड़ी संरक्षण को लेकर कानून लाने की घोषणा का स्वागत किया। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह कानून प्रदेश की तत्काल और अनिवार्य आवश्यकता है—विशेषकर पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और फलोदी जैसे क्षेत्रों में, जहाँ अंधाधुंध खेजड़ी कटान ने पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर खतरे में डाल दिया है।विधायक भाटी ने कहा कि खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि मरुस्थलीय जीवन-प्रणाली की रीढ़ है। इसके संरक्षण के लिए संत-महात्मा आमरण अनशन पर बैठे रहे, जिससे जनाक्रोश भी स्पष्ट रूप से सामने आया। ऐसे में सरकार द्वारा कानून लाने की बात न केवल जनभावनाओं का सम्मान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए दूरदर्शी कदम भी है। यदि यह कानून सख्ती से लागू होता है, तो भविष्य को समृद्ध वन्य-संपदा सौंपना संभव होगा।भाटी ने दो टूक कहा कि “विकास के नाम पर विनाश कतई स्वीकार नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण-संरक्षण और विकास—दोनों के बीच संतुलन ही टिकाऊ भविष्य का मार्ग है। विधायक ने खेजड़ी बचाओ आंदोलन में संघर्षरत संत-महात्माओं और छत्तीस क़ौम के नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खेजड़ी संरक्षण को लेकर संतों का जो भी मार्गदर्शन रहेगा, वह उसका पूर्ण पालन करेंगे।गौरतलब है कि इसी सत्र में विधायक भाटी ‘अमृता देवी राज्य वृक्ष संरक्षण विधेयक, 2026’ को प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में प्रस्तुत करने जा रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा स्वयं कानून लाने की घोषणा को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह पहल न केवल पश्चिमी राजस्थान, बल्कि पूरे प्रदेश के पर्यावरणीय भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
Author: Thar News Live


